दोस्तों , मैं आपके सामने एक नज़म पेश कर रहा हूँ | उम्मीद करता हूँ की आपको पसंद आएगी ये नज़म मेरे किसी ख़ास दोस्त के लिए है …
ज़िंदगी की भीड़ में के अजनबी मिला ,
फिर पास आया मेरे और ज़िंदगी बना !
कुछ दिन तो मेरे साथ चला दोस्त बनके वो ,
फिर भी हर मोड़ पर कुछ फासला रहा !
जिसका हुआ तुझे कभी एहसास तक नही ,
वो दर्द हमने ज़िंदगी का बेइन्तहा सहा !
इए दोस्त तेरे दिल की कसक जानता हूँ मैं ,
गर मैं नही तो चैन से तू भी नही रहा !



January 22, 2008 at 6:29 pm
bahot acche
January 23, 2008 at 6:25 am
That’s realy good
September 28, 2008 at 1:07 pm
तुमको देखा तो यह ख़्याल आया की कल रात को मैंने इतना क्यों खाया
September 28, 2008 at 1:08 pm
तू मेरे दिल में ऐसे समाई है
जैसे बाजरे के खेत में भैंस घुस आई है