अभी शादी का पहला ही साल था

अभी शादी का पहला ही साल था,
ख़ुशी के मारे बुरा हाल था!
खुशियाँ कुछ यूँ उमड़ रही थीं,
की संभाले नहीं संभल रही थी!!सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आना,
थोडा शर्माते हुए हम नींद से जगाना,
वो प्यार भरा हाथ हमारे बालों में फिराना,
मुस्कुराते हुए कहना की डार्लिंग चाय तो पी लो,
जल्दी से रेडी हो जाओ आपको ऑफिस भी जाना है!!

घरवाली भगवान् का रूप लेकर आयी थी,
दिल और दिमाग दोनों पर छाई थी
सांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
एक पल भी जीना दूर दुस्वार होता था!!

५ साल बाद………..

सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आना
टेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,
आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को श्कूल छोड़ते हुए जाना……………

एक बार फिर वोही आवाज आयी,
क्या बात है अभी तक छोड़ी नहीं चारपाई,
अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना!!
मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना!!

न जाने घरवाली कैसा रूप लेकर आयी थी,
दिल और दिमाग पर काली घटा चाई थी!!
साँस भी लेते तो उन्ही का ख्याल होता,
हर समय जेहान में एक ही सवाल होता!!
क्या कभी वो दिन लौटकर आएगा,
क्या हम एक बार फिर कुवारे बन पाएंगे!

by Aryan

मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला!!!

मदिरा पीने की अभिलाषा ही बन जाए जब हाला,
अधरों की आतुरता में ही जब आभासित हो प्याला,
बने ध्यान ही करते-करते जब साकी साकार, सखे,
रहे न हाला, प्याला, साकी, तुझे मिलेगी मधुशाला।।९।

सुन, कलकल़ , छलछल़ मधुघट से गिरती प्यालों में हाला,
सुन, रूनझुन रूनझुन चल वितरण करती मधु साकीबाला,
बस आ पहुंचे, दुुर नहीं कुछ, चार कदम अब चलना है,
चहक रहे, सुन, पीनेवाले, महक रही, ले, मधुशाला।।१०।

जलतरंग बजता, जब चुंबन करता प्याले को प्याला,
वीणा झंकृत होती, चलती जब रूनझुन साकीबाला,
डाँट डपट मधुविक्रेता की ध्वनित पखावज करती है,
मधुरव से मधु की मादकता और बढ़ाती मधुशाला।।११।

मेंहदी रंिजत मृदुल हथेली पर माणिक मधु का प्याला,
अंगूरी अवगुंठन डाले स्वर्ण वर्ण साकीबाला,
पाग बैंजनी, जामा नीला डाट डटे पीनेवाले,
इन्द्रधनुष से होड़ लगाती आज रंगीली मधुशाला।।१२।

अपने ही में हूँ मैं साकी

मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला,
भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला,
उठा कल्पना के हाथों से स्वयं उसे पी जाता हूँ,
अपने ही में हूँ मैं साकी, पीनेवाला, मधुशाला।।५।

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला,
‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ -
‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।’। ६।

चलने ही चलने में कितना जीवन, हाय, बिता डाला!
‘दूर अभी है’, पर, कहता है हर पथ बतलानेवाला,
हिम्मत है न बढूँ आगे को साहस है न फिरुँ पीछे,
किंकर्तव्यविमूढ़ मुझे कर दूर खड़ी है मधुशाला।।७।

मुख से तू अविरत कहता जा मधु, मदिरा, मादक हाला,
हाथों में अनुभव करता जा एक ललित किल्पत प्याला,
ध्यान किए जा मन में सुमधुर सुखकर, सुंदर साकी का,
और बढ़ा चल, पिथक, न तुझको दूर लगेगी मधुशाला।।८।

तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तुझको फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१।

प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,
एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,
जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चुका,
आज निछावर कर दूँगा मैं तुझ पर जग की मधुशाला।।२।

प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला,
अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,
मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता,
एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला।।३।

भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,
किव साकी बनकर आया है भरकर किवता का प्याला,
कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!
पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला।।४।

बातें करके रुला ना दीजिएगा…

बातें करके रुला ना दीजिएगा…
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा…

ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही…
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा…

खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया…
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया…

पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम…
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया…

अब और मंज़िल पाने की हसरत नही…
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही…

आप जैसे दोस्त जबसे मिले…
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही ***!

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का…..

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..

येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..

नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..

कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..

सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..

माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये “अभी”
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..

ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में. i miss you dost

तड़प कर देख किसी की चाह मैं

तड़प कर देख किसी की चाह  मैं
पता  चले  प्यार  क्या  होता  है
मील  जाए हर  कोई यूं  ही  राहों  में
तोह कैसे  पता चले इंतज़ार  क्या होता है

इस दो पल की जिंदगी

इस दो पल की जिंदगी मैं तन्हाई क्यों है,

लोगो को हम से रुसवाई क्यों है, इस दुनिया मै इन्सान कम नही है,

फ़िर भी हमारे साथ सिर्फ़ हमारी परछाई क्यों है.

by jagat upreti

माने या न माने ऐसा ही है…

शिवांगी 2 साल की है। उसके दो बड़े भाई हैं जिनकी आयु लगभग पाँच और सात साल है। एक दिन उसकी मम्मी फॉन पर किसी से बात कर रही थी, तभी धड़ाम की आवाज़ आई। कुछ पल में ही शिवाँगी रोती हुई आ गयी और और तेज़ आवाज़ में रोने लगी। जब माँ ने प्यार से सहलाते हुए चोट  के बारे में पूछा तो बोली-” जब मैं पलंग से लुढ़क गयी थी तो मनी (उससे बड़ा भाई) मुझे देखकर हंस रहा था।”