दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का…..

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..

येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..

नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..

कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..

सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..

माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये “अभी”
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..

ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में. i miss you dost

तड़प कर देख किसी की चाह मैं

तड़प कर देख किसी की चाह  मैं
पता  चले  प्यार  क्या  होता  है
मील  जाए हर  कोई यूं  ही  राहों  में
तोह कैसे  पता चले इंतज़ार  क्या होता है

इस दो पल की जिंदगी

इस दो पल की जिंदगी मैं तन्हाई क्यों है,

लोगो को हम से रुसवाई क्यों है, इस दुनिया मै इन्सान कम नही है,

फ़िर भी हमारे साथ सिर्फ़ हमारी परछाई क्यों है.

by jagat upreti

माने या न माने ऐसा ही है…

शिवांगी 2 साल की है। उसके दो बड़े भाई हैं जिनकी आयु लगभग पाँच और सात साल है। एक दिन उसकी मम्मी फॉन पर किसी से बात कर रही थी, तभी धड़ाम की आवाज़ आई। कुछ पल में ही शिवाँगी रोती हुई आ गयी और और तेज़ आवाज़ में रोने लगी। जब माँ ने प्यार से सहलाते हुए चोट  के बारे में पूछा तो बोली-” जब मैं पलंग से लुढ़क गयी थी तो मनी (उससे बड़ा भाई) मुझे देखकर हंस रहा था।”