इस दो पल की जिंदगी

इस दो पल की जिंदगी मैं तन्हाई क्यों है,

लोगो को हम से रुसवाई क्यों है, इस दुनिया मै इन्सान कम नही है,

फ़िर भी हमारे साथ सिर्फ़ हमारी परछाई क्यों है.

by jagat upreti

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