बातें करके रुला ना दीजिएगा…

बातें करके रुला ना दीजिएगा…
यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा…

ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही…
पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा…

खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया…
दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया…

पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम…
जिसने दोस्ती को दिल से निभाया…

अब और मंज़िल पाने की हसरत नही…
किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही…

आप जैसे दोस्त जबसे मिले…
किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही ***!

आँखों का इलाज

    अगर आप को अपने ऑंखें पर ज्यादा यकीन हो तो आप १ बार इस तस्वीर के बीच के पॉइंट को ध्यान से देखें |यदि आप इस पॉइंट को १ मिनट तक लगातार देख सकते हैं तो आपकी ऑंखें यकीनन बहुत अच्छी हैं !नहीी तो आप अपने आँखों के बारे मे राय कमेंट के रूप में दे सकते हैं |

आँखों का इलाज

धन्यवाद

पलक जब झपके आए सामने तेरा चेहरा

आज भी पलक जब झपके
आए सामने तेरा चेहरा
तुम क्या गई हो ज़िंदगी से
हो गया हूँ और भी तनहा

तुम्हारी वो हँसी
अब भी याद आती है
वो पहली मुलाक़ात
मुस्कान छोड़ जाती है !

तुम्हारी बातों के वान
दिल में अब तक मचला करते हैं
क्यों दिल की बात न कह सके
अपने आप से शिकायत करते हैं !

बेवफाई का दाग तुम्हे देके
अपने आप को बचाना चाहते हैं
लफ्जों के बानों से हम
मोहोब्बत इन्तेहा जताना चाहतें हैं !

केवल “ P ” के याद में

आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है

मुद्दत हो गयी उन तनहाइयों को गुजरे ,
आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है
चुन चुन कर जिसकी यादों को अपने जीवन से निकाला मैंने
मेरे दिल पर आज भी उसकी हुकूमत क्यों है
तोड़ दिया जिसने यकीं मोहब्बत से मेरा
वो शख्स आज भी मेरे प्यार के काबिल क्यों है
रास ना आये जिसको चाहत मेरी
आज भी वो मेरे दिन और रात में शामिल क्यों है
खत्म हो गया जो रिश्ता वो आज भी सांस ले रहा है
मेरे वर्तमान में जीवित वो आज भी मेरा अतीत क्यों है

सर, हमें हंसाओ न

यह आदर्श वाक्य ठीक भी हो सकता है कि आदमी को ठोंक-ठांक कर ठीक-ठाक बनाने में इसी धरती के महापुरूषों का ब़डा योगदान रहता आया है। परंतु इस आदर्श वाक्य का एक दूसरा पहलू भी है। यह पहलू सोचनीय है और इस प्रश्न पर आकर अटक जाता है कि क्या इसी को ‘ठीक-ठाक’ करना कहते हैं? इस सन्दर्भ का एक नमूना प्रस्तुत है।

भाई चिमनलाल ने एम.ए. की डिग्री कमा रखी है।भगवान करे, उसकी डिग्री सलामत रहे। इसी डिग्री के बूते वह टीचर है। उसके हिसाब से तनख्वाह अच्छी नहीं है और इर्द-गिर्द और भी बहुत कुछ अच्छा नहीं है। मसलन, चांद का मुंह टेढ़ा है, सूरज फीका है, धरती दोगली है, राजनीति खोखली है, आदि-आदि। विद्यार्थियों के सामने ख़डा होकर पढ़ाना उसका काम है, इसलिए यह दुनिया उसके लिए और भी अच्छी नहीं है। परन्तु क्या करे, तनख्वाह के लिए इस दुनिया का सामना तो करना ही प़डता है। उसका दावा है कि विद्यार्थियों को पढ़ाना सहज नहीं है। गंभीर शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों को पढ़ाना सहज नहीं है। गंभीर शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों के साथ जु़डना चाहते तो वे कुछ ग्रहण नहीं कर पाऍंगे और टीचर ने नाते अपनी हालत पागल से भी बदतर होती जाएगी।

लव के रूप | मैं प्यार करती

मैं तुमसे बहूऊऊऊऊऊऊत् प्यार करती हूँ .
मैं कुछ भी नहीं तुम्हारे बिना !
मुझमे क्या कमी है की वो प्यार नहीं करती !
मैं तुम्हे पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ !
मैं तुमपे जान देती हूँ , क्या तुम्हे एक बार भी मुझसे लव नहीं हुआ ,क्या तुमने एक पल के लिए भी मुझसे प्यार नहीं किया ?
क्या तुम कभी लाइफ में एक बार मुझे याद करोगे ?
क्या तुम्हे कभी लगेगा की मैं तुम्हारे लिए सही था ?
तुम्हे मुझसे अच्छा कोई नहीं मिल सकता दुनिया में , तुम्हे मुझसे ज्यादा प्यार करने वाला नहीं मिल सकता
अगर मैंने इतनी मेहनत इतने दिल से भगवान् को बुलाया होता , तो वो मेरे पास आ जाते !
तुम्हे मैं बहुत खुश रखूँगा !
मैं हर वक्त ये ही सोचता हूँ की इस वक्त तुम क्या सोच रहे होगे , कैसा फील कर रहे होगे !
मैं तुम्हे हर पल मिस करती ह
जब तुम मेरे पास होती हो , उस पल मैं बहुत खुश रहता ह !
मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ !
तुम अगर मिल जाओ , तो मैं दुनिया बदल सकता हूँ
मैं तुम्हारी साँसे फील कर सकती हूँ
क्या तुम्हे मुझपे बिल्कुल तरस नहीं आता ? इतना मत तडपाओ , की एक दिन मुझे अपने आपसे नफरत हो जाए !
तुम इतना मना मत करो मुझे , इतना इग्नोर मत करो मुझे , की मैं तुमसे नफरत करने लगूँ एक दिन
एक बार मेरी आंखों में देखो , क्या तुम्हे एक पल भी नहीं लगता की मैं प्यार करती / करता हूँ
क्या मेरी आंखो में तुम्हे प्यार नहीं दिखता ?
हम कई जन्मों से साथ साथ हैं
काश तुम समझ सकते मुझे

मोहब्बतें - उनकी मोहब्बत बढ़ी और दुनिया से खुशी कम होती रही

अलबामा में 53 साल पहले पैदा हुई थी, इसी माह की किसी तारीख को। उत्तरी अमेरिका के इस हिस्से में आज भी जातीय भावनाएं कायम हैं, तब तो वहां काले लोग अछूत ही माने जाते थे। वे बसों में पीछे ही बैठ सकते थे, उनके रेस्टोरेंट्स अलग थे। उसने भी सहा। सर्कस देखने गई तो बाहर कर दी गई, होटल में रूम नहीं मिला, यही नहीं, डिपार्टमेंटल स्टोर में कपड़े खरीदे तो उसे फिटिंग चेक करने के लिए ट्रायल रूम में नहीं स्टोररूम में जगह मिली (ट्रायलरूम में सिर्फ गोरे जा सकते थे)। 1963 में उसके साथ जो घटना हुई, आज तक नहीं भूली वह। कालों को निशाना बनाकर बमिंघम चर्च में हुए बम विस्फोट में उसकी दोस्त समेत चार काली लड़कियां मारी गईं। उसने भी धमाके देखे और सुने। वह कहती है, उस दृश्य और आवाज को मैं कभी न भूल पाऊंगी। लेकिन वह नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाली इंसान न बन सकी। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड कानफर्मिस्ट नेचर का था। उसने अपना ध्येय बनाया खूब मेहनत करना और गोरों से दोगुना बेहतर बनना। पिता ने मंत्र दिया कि व्यवस्था से टकराओ नहीं, मेहनत करो, आगे बढ़ो और व्यवस्था का फायदा उठाओ।
उसने यही किया। तीन साल की उम्र से फ्रेंच सीखना शुरू किया। स्केटिंग उसका पसंदीदा गेम था और बैले अपनी भावनाओं को विस्तार देने का साधन। वायलिन बजाना उसे अच्छा लगता था और वह चाहती थी अच्छी वायलिनवादक बने लेकिन इससे जीवनयापन मुश्किल था सो उसने इरादा बदला। जब यूनिवसिर्टी पहुंची, कोल्ड वार में रुचि बढ़ी और फिर सोवियत संघ पर एक लेक्चर सुना तो राह ही बदल गई। उसने मिलिटरी डाक्टराइन और चेकोस्लोवाकिया पर पीएचडी की और पहुंच गई स्टैनफोर्ड यूनिवसिर्टी में पढ़ाने। वहां वह रिपब्लिकन हो गई और मौका मिला अमेरिकी राष्ट्रपति को सोवियत मामलों पर सलाह देने का।
उसकी मुलाकात राष्ट्रपति के बेटे से हुई। दिन निकलते रहे। राष्ट्रपति के बेटे के सितारे बुलंद हुए और साथ ही उसके भी। उसने न शादी की और न मोहब्बत का इजहार (शायद)। हां एक बार गलती से राष्ट्रपति के बेटे को अपना हसबैंड जरूर बोल गई, जाने कैसे। लेकिन बुलंद सितारों के साथ ही शुरू हुई असफलताओं की कहानी। 9/11 से शुरू होकर यह सफर आज भी जारी है। अफगानिस्तान, इराक और अब ईरान इसी मोहब्बत की गर्माहट में झुलस रहे हैं और साथ में पूरी दुनिया।
वह बताती है कि जब मैं चार साल की थी, मेरे पिता ने मेरी एक फोटो ली थी जिसमें मैं सांताक्लाज की गोद में थी और यकीन करिए फोटो में मेरे चेहरे के भाव दूरियों वाले थे क्योंकि मैं कभी किसी गोरे के इतने करीब पहले कभी नहीं गई थी। लेकिन अब उसके चेहरे पर आश्वस्ति के भाव दिखाई देते हैं। आज भी वह अच्छी वायलिन बजाती है।