लडकी लड़का और मैं

[1]             

             एक बार एक बार मैं और मेरे कुछ मित्र  देल्ही से ताज महल देखने गए ! मेरे मित्रों को  ताज महल बहुत पसंद आया ! उन्होंने निर्णय किया की ताज को धकेलकर देल्ही ले जायेंगे ! सब मिलकर ताज को पुश कराने लगे ! धीरे धीरे उनको पसीना आने लगा तो सबने अपने अपने शर्ट उतरकर पीछे रखे और वापस पुश करने लगे !
थोडी देर में वहाँ एक चोर आया उसने देखा की हम सब व्यस्त हैं ! चोर सब कपड़े उठा के  भाग गया ! जैसे अँधेरा होने लगा , हम सब अपने शर्ट खोजने लगे ! इतने में मैं एकदम खुश हुआ और चिल्लाने लगा …….. ..

अरे देखो दोस्तों हम ताज को कितना दूर ले आये , यहाँ से तो हमारे कपड़े भी नही दिख रहे हैं

[2]

लडकी : क्या तुम मुझे शादी के बाद भी इसी तरह प्यार करोगे ,
लड़का : हाँ अगर तुम्हारा पति इजाजत देगा तो  …

2 Responses to “लडकी लड़का और मैं”

  1. RAVIKIRAN Says:

    मनात खुप काही साठ्लेलं असते. ते प्रत्येकवेळी वर येईलच असे नाही..पण कधीतरी काहीतरी सूचत जाते… मन सैरभर होते अन,मग को-या कागदावर शब्द सांडून जातात…ती असते ..माझ्या मनातली वेदना…!


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